धनंजय सिंह

प्रवासी श्रम इतिहास

यह पुस्तक यह तो दावा नहीं करती है कि भोजपुरी प्रदेश से होने वाले श्रम प्रवसन का पूरा इतिहास यही हो सकता है। पर हां, मौखिकता के जरिये ही उन्हें सही मायनों में समझा जा सकता है। यह दावा यहां जरूर है। मौखिक स्रोतों के सहारे यह पुस्तक प्रवसन से प्रभावित भोजपुरिया समाज व संस्कृति के विविध तहों तक जाती है। मौखिक स्रोतों के भीतर सांस लेते प्रवासी श्रम इतिहास लेखन बहुत कम है और जो है

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